मायावती जी का आज का भाषण - दूध के धुले नहीं हैं नरेंद्र मोदी, ललित मोदी और विजय माल्या को देश से भगाया,
साथ ही आज की नरेंद्र मोदी की ग़ाज़ीपुर की रैली बुरी तरह से फ्लॉप
नोटबंदी की आड़ में मोदी सरकार जनता को परेशान कर रही है।
सरकार के इस फैसले के चलते महिलाएं और बच्चे घंटों खुले आसमान के नीचे खड़े रहने को मजबूर हैं।
मोदी कोई दूध के धुले नहीं हैं,
उन्होंने ललित मोदी और विजय माल्या को देश से बाहर भगा दिया।
बी.एस.पी. नोटबंदी के खिलाफ नहीं है, हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, बल्कि हम आम लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ है।
मोदी सरकार अगले 1 माह तक धैर्य रखने की बात कहकर लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।
पीएम ने भ्रष्टाचार पर कहा कि बेईमानों से काली कमाई का हिसाब लिया जाएगा, लेकिन हमारी पार्टी का कहना है कि देश की जनता हर प्रकार के भ्रष्टाचार से स्थाई मुक्ति चाहती है।
आम जनता ने कांग्रेस को केंद्र से इस उम्मीद से बाहर कर दिया था कि उसे भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। पीएम काला धन और करप्शन पर अंकुश लगाने की आड़ में जनता को खुले आसमान के नीचे खड़ा करवा रही है।
किसी ने भी इस भयावह स्थिति की कल्पना नही की थी।
मोदी सरकार ने देश में 66 हजार करोड़ के कालेधन को सफेद करवा दिया। किसी का भी काला चेहरा जनता के सामने नहीं आया। सरकार ने नोट पाबंदी लगाकर गरीबों, मरीजों को भारी मुसीबत में डालकर घंटों खड़ा करके गलत काम किया है।
साथ ही आज की मोदी की गाजीपुर की रैली को पूरी तरह से फ्लॉप, उनके भाषण को 'थोथा चना, बाजे घना'।
पूरा भाषण पढ़ें -
बंधुओं गाजीपुर में बीजेपी की हुई आज की रैली बुरी तरह से फ्लॉप हुई है, इस रैली के बारे में वैसे आप लोगों को यह मालूम है कि बीजेपी के लोगों ने इस रैली को कामयाब बनाने के लिये पूरी ताकत लगाई थी जैसा की मुझे गाजीपुर के लोगों ने ये बताया है कि इस रैली में जो लोग ज्यादातर पहुँचे हैं वो बिहार के लोग हैं,
गाजीपुर बिलकुल बिहार से लगा हुआ है, पूरे पूर्वांचल के लोगों को इकट्ठा किया गया था।
लोग तो यह भी बता रहे हैं कि इन्होंने ढाई वर्षों में जो कालाधन इकठ्ठा किया है, अपनकी पार्टी की फर्जी मेंबरशिप के जरिये तो उस पैसे से 250-250 रुपये लोगों को देकर ये लोग बसों में लाये हैं और रेलगाडियां इन्होंने फ्री कर दी।
जिन लोगों को लायें वो किराये से नही आये,
एक तरफ तो श्री नरेंद्र मोदी ये कहते हैं मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ हूँ तो वहीँ दूसरी तरफ तो इन्होंने जो सरकारी रेल हैं उसका राजनीतिकरण कर दिया और बिना भाड़े के, बिना किराये के रैली में लोगों को लाया गया,
क्या श्री नरेंद्र मोदी को भी जवाब देंगे, क्या अपनी गिरेबान में झांक कर देंगे?
वो कितने दूध के धुले हैं,
मोदी दूसरों को सलाह देने से पहले ये बतायें कि वो भ्रष्टाचार के ऊपर अकुंश लगाने के मामले में वे अपने लिये वो कितने साफ-सुथरे हैं? कितना वो अमल करते हैं पहले ये तो बतायें?
आज की जो गाजीपुर की रैली बुरी तरह से फ़ैल हुई है, अपनी पूरी ताकत लगाकर ये लोग एक लाख लोग भी भी इकट्ठा नही कर पाये,
मुश्किल से 20-25 हजार लोग ही इकट्ठा हो पाये जबकि पूरे बिहार की ताकत लगा दी, रेल फ्री कर दी, बसें फ्री कर दी, दिहाड़ी में लोग लाये गये और अपनी पूरी ताकत लगाकर ये रैली की जो कक बुरी तरीके से फ़ैल हुई है यह किसी से छिपने वाली नही हैं।
श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी की गाजीपुर की हुई रैली में अपने पूरे भाषण के दौरान, जितने समय भी उन्होंने भाषण दिया है अपने भाषण के दौरान जो कुछ भी कहा है वह पूर्ण रूप से "थोथा चना व बाजे घना" की तरह ही है।
सबसे पहले उन्होंने अपने भाषण में खासकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुये जो यह कहा है कि बेईमानों से आजादी के बाद से अब तक के काली-कमाई के हिसाब लिये जायेंगे, अच्छी बात है इस पर हमारी पार्टी का भी यह कहना है कि देश की आमजनता हर प्रकार के भ्रष्टाचार, कालाधन, जमाखोरी व राष्ट्रीय सम्पत्ति के लूट आदि के अभिशाप से स्थायी मुक्ति चाहती हैं।
इस भयावय स्थिति की कल्पना लोगों ने कभी नही की थी।
वहीँ दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचारी ललित मोदी व विजय माल्या को देश से भगा दिया, बाहर भेज दिया, विदेश भेज दिया। और साथ ही देश में हजार करोड़ रूपये के कालेधन को सफेद करवा दिया और उनमे से किसी का भी काला चेहरा आमजनता के सामने नही आने दिया।
किन्तु 500 व 1000 के नोटों पर पाबन्दी लगाकर देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, महिलाओं, बच्चों, छात्रों, युवकों, मरीजों, लाचार लोगों को भारी मुसीबत में डालकर उन्हें घण्टो-घण्टों खुले आसमान में खड़ा करवाकर क़ानूनी तौर पर जनपीड़ा देने का ये गलत काम ये अवश्य ही इन्होंने किया है।
इस प्रकार देश की आमजनता को क़ानूनी तौर पर ऐसी कड़ी सजा क्यों?
इसका जवाब श्री नरेंद्र मोदी को जरूर देना होगा।
इसके आलावा देश की लगभग समस्त आर्थिक गतिविधि व करोड़ों व छोटे मध्यम व्यवसाय को ठग करके या भारत बन्द का जो आयोजन भाजपा सरकार द्वारा किया गया जैसे हालात अब पैदा हो गये ऐसा लग रहा है जैसे भारत बन्द हो गया हो, अर्थात यहाँ भारत बन्द का जो आयोजन भाजपा सरकार द्वारा किया गया है उससे अच्छे दिन की उम्मीद लगाये बैठे करोड़ों लोगों को अब यहाँ काफी ज्यादा बुरे दिनों का सामना करना पड़ रहा है और आगे सब इस स्थिति में यथाशीघ्र मुक्ति चाहते हैं।
इतना ही नही बल्कि केंद्र की सरकार द्वारा लोगों से एक महीने तक धैर्य रखने के लिये जो कहा जा रहा है वे सरकारी घोषणा वास्तव में लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा ही है ऐसा प्रतीत हो रहा है और अब यहाँ यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि केंद्र की भाजपा सरकार को इतने अपरिपक्व तरीके से व कच्चे तरीके से जनसाधारण को इतना अत्याधिक प्रभावित करने वाले फैसले लेने में इतनी जल्दबाजी व आपाधापी करने की इतनी जरूरत क्या थी।
जब हम जल्दबाजी बोलते हैं तो कल प्रधानमंत्री जी बोल रहे थे कि हमने ये फैसला कोई जल्दबाजी में नही लिया है, उनका यह कहना था कि हमने यह फैसला सीक्रेट रखा और 10 महीने से इसकी तैयारी चल रही थी।
मैं पूछना चाहती हूँ, (10 महीने का समय बहुत होता है) प्रधानमंत्री जी से कि 10 महीने में यदि इनकी सही मायनों में तैयारी होती तो आज जो बुरा हाल है पूरे देश के अंदर लोगों को एक-एक हजार के नोट भी नहीं मिल रहे, एटीएम मशीनें खराब पड़ी हुई हैं, बैंकों से पैसा नही मिल रहा है।
मैं इनसे पूछना चाहती हूँ की 10 महीनों में जो ये नये नोट ला रहे थे वह कहाँ हैं?
वो तो जनता के सामने आने चाहिये।
कभी ये छुट्टी का बहाना बनाते हैं, कभी बोलते हैं अभी पैसे आ रहे हैं थोडा इंतजार करो,
ऐसे ने जनता का बहुत बुरा हाल है।
पूरे देश के अंदर, तो ये आपाधापी जो मची हुई है, ये जो 10 महीनों की बात कर रहे हैं मैं समझती हूँ यह बिलकुल गलत है और 10 महीने का समय बहुत होता है, यदि 10 महीनों में इन्होंने पूरी तैयारी की होती तो ऐसी नोबत नहीं आती,
इन्होंने 500 और 1000 के नोटों पर जो पाबन्दी लगाई है हमारी पार्टी इसके खिलाफ नही है हम इसका वेलकम करते हैं लेकिन ये फैसला लेने से पहले इनको पूरी तैयारी करनी चाहिये थी।
यदि 10 महीनों की पूरी तैयारी होती तो 8 -9 तारिक से लेकर जो पूरे देश की जनता में जो हाहाकार मचा हुआ है, वे अपने कामकाज भूल गये, बुरा हाल है देश के अंदर, त्राहि-त्राहि मची है, अफरा-तफरी का माहौल पैदा है। ऐसा लग रहा है जैसे भारत बन्द हो गया हो हालात बड़े ख़राब हैं तो मैं समझती हूँ ऐसे हालत पैदा नही होते।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी प्रकार की जिद्दीभरी व अपरिपक्व पूर्ण किसान-विरोधी फैसला, नया भूमिअधिग्रहण कानून बनाने के सम्बंध में भी पहले लिया था जैसे अब ये कच्चा फैसला लिया है, अपरिपक्व फैसला लिया है तो ये भी आप लोगों को याद होगा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी प्रकार की जिद्दीभरी व अपरिपक्व पूर्ण किसान-विरोधी फैसला नया भूमिअधिग्रहण कानून बनाने के सम्बंध में भी पहले लिया था और उसके लिये एक ही अध्यादेश को अनेकों बार जारी करने जी जो हठधर्मी की थी, हालांकि बाद में भारी जनविरोध के मद्देनजर फिर इनको अपने उस फैसले को वापिस भी लेना पड़ा था, ये भी आप लोगों से छिपा नही है।
इसके साथ ही इन्होंने देश में 500 व 1000 रूपये के नोटों पर बोलते हुये यह भी कहा कि कि मेरे इस फैसले से देश में अमीर नींद की गोलिया खाकर और गरीब चैन की नींद सो रहा है।
इनका यह बयान पूर्णतया हवा-हवाई व खोखला है, इसके सिवाय कुछ नही है जबकि इस मामले में वास्तव में सच्चाई यह है कि इनके इस फैसले से देश में गरीब नींद की गोलिया खाकर और आमिर चैन की नींद सो रहे हैं, गरीब लोग या तो मारे-मारे घूम रहे हैं या लाइन लगाकर घूम रहे हैं।
सही मायने में गरीब नींद की गोली खाकर अपने घर में भूखे-प्यासे हैं तथा आमिर लोग चैन से सो रहे हैं यह उनको बोलना चाहिये था जो इस समय के वर्तमान हालात हैं जिनकी मदद के लिये यानि कि जिन अमीर लोगों की मदद के लिये जो चैन की नींद से सो रहे हैं जिनकी मदद के लिये इन्होंने 500 व 1000 के नोटों पर प्रतिबन्ध लगाने से पहले अंदर-अंदर व्यवस्था भी कर दी थी ऐसी आम चर्चा ये लोगों में है।
साथ ही आज की नरेंद्र मोदी की ग़ाज़ीपुर की रैली बुरी तरह से फ्लॉप
नोटबंदी की आड़ में मोदी सरकार जनता को परेशान कर रही है।
सरकार के इस फैसले के चलते महिलाएं और बच्चे घंटों खुले आसमान के नीचे खड़े रहने को मजबूर हैं।
मोदी कोई दूध के धुले नहीं हैं,
उन्होंने ललित मोदी और विजय माल्या को देश से बाहर भगा दिया।
बी.एस.पी. नोटबंदी के खिलाफ नहीं है, हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, बल्कि हम आम लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ है।
मोदी सरकार अगले 1 माह तक धैर्य रखने की बात कहकर लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है।
पीएम ने भ्रष्टाचार पर कहा कि बेईमानों से काली कमाई का हिसाब लिया जाएगा, लेकिन हमारी पार्टी का कहना है कि देश की जनता हर प्रकार के भ्रष्टाचार से स्थाई मुक्ति चाहती है।
आम जनता ने कांग्रेस को केंद्र से इस उम्मीद से बाहर कर दिया था कि उसे भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। पीएम काला धन और करप्शन पर अंकुश लगाने की आड़ में जनता को खुले आसमान के नीचे खड़ा करवा रही है।
किसी ने भी इस भयावह स्थिति की कल्पना नही की थी।
मोदी सरकार ने देश में 66 हजार करोड़ के कालेधन को सफेद करवा दिया। किसी का भी काला चेहरा जनता के सामने नहीं आया। सरकार ने नोट पाबंदी लगाकर गरीबों, मरीजों को भारी मुसीबत में डालकर घंटों खड़ा करके गलत काम किया है।
साथ ही आज की मोदी की गाजीपुर की रैली को पूरी तरह से फ्लॉप, उनके भाषण को 'थोथा चना, बाजे घना'।
पूरा भाषण पढ़ें -
बंधुओं गाजीपुर में बीजेपी की हुई आज की रैली बुरी तरह से फ्लॉप हुई है, इस रैली के बारे में वैसे आप लोगों को यह मालूम है कि बीजेपी के लोगों ने इस रैली को कामयाब बनाने के लिये पूरी ताकत लगाई थी जैसा की मुझे गाजीपुर के लोगों ने ये बताया है कि इस रैली में जो लोग ज्यादातर पहुँचे हैं वो बिहार के लोग हैं,
गाजीपुर बिलकुल बिहार से लगा हुआ है, पूरे पूर्वांचल के लोगों को इकट्ठा किया गया था।
लोग तो यह भी बता रहे हैं कि इन्होंने ढाई वर्षों में जो कालाधन इकठ्ठा किया है, अपनकी पार्टी की फर्जी मेंबरशिप के जरिये तो उस पैसे से 250-250 रुपये लोगों को देकर ये लोग बसों में लाये हैं और रेलगाडियां इन्होंने फ्री कर दी।
जिन लोगों को लायें वो किराये से नही आये,
एक तरफ तो श्री नरेंद्र मोदी ये कहते हैं मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ हूँ तो वहीँ दूसरी तरफ तो इन्होंने जो सरकारी रेल हैं उसका राजनीतिकरण कर दिया और बिना भाड़े के, बिना किराये के रैली में लोगों को लाया गया,
क्या श्री नरेंद्र मोदी को भी जवाब देंगे, क्या अपनी गिरेबान में झांक कर देंगे?
वो कितने दूध के धुले हैं,
मोदी दूसरों को सलाह देने से पहले ये बतायें कि वो भ्रष्टाचार के ऊपर अकुंश लगाने के मामले में वे अपने लिये वो कितने साफ-सुथरे हैं? कितना वो अमल करते हैं पहले ये तो बतायें?
आज की जो गाजीपुर की रैली बुरी तरह से फ़ैल हुई है, अपनी पूरी ताकत लगाकर ये लोग एक लाख लोग भी भी इकट्ठा नही कर पाये,
मुश्किल से 20-25 हजार लोग ही इकट्ठा हो पाये जबकि पूरे बिहार की ताकत लगा दी, रेल फ्री कर दी, बसें फ्री कर दी, दिहाड़ी में लोग लाये गये और अपनी पूरी ताकत लगाकर ये रैली की जो कक बुरी तरीके से फ़ैल हुई है यह किसी से छिपने वाली नही हैं।
श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी की गाजीपुर की हुई रैली में अपने पूरे भाषण के दौरान, जितने समय भी उन्होंने भाषण दिया है अपने भाषण के दौरान जो कुछ भी कहा है वह पूर्ण रूप से "थोथा चना व बाजे घना" की तरह ही है।
सबसे पहले उन्होंने अपने भाषण में खासकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुये जो यह कहा है कि बेईमानों से आजादी के बाद से अब तक के काली-कमाई के हिसाब लिये जायेंगे, अच्छी बात है इस पर हमारी पार्टी का भी यह कहना है कि देश की आमजनता हर प्रकार के भ्रष्टाचार, कालाधन, जमाखोरी व राष्ट्रीय सम्पत्ति के लूट आदि के अभिशाप से स्थायी मुक्ति चाहती हैं।
इस भयावय स्थिति की कल्पना लोगों ने कभी नही की थी।
वहीँ दूसरी तरफ केंद्र की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचारी ललित मोदी व विजय माल्या को देश से भगा दिया, बाहर भेज दिया, विदेश भेज दिया। और साथ ही देश में हजार करोड़ रूपये के कालेधन को सफेद करवा दिया और उनमे से किसी का भी काला चेहरा आमजनता के सामने नही आने दिया।
किन्तु 500 व 1000 के नोटों पर पाबन्दी लगाकर देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, महिलाओं, बच्चों, छात्रों, युवकों, मरीजों, लाचार लोगों को भारी मुसीबत में डालकर उन्हें घण्टो-घण्टों खुले आसमान में खड़ा करवाकर क़ानूनी तौर पर जनपीड़ा देने का ये गलत काम ये अवश्य ही इन्होंने किया है।
इस प्रकार देश की आमजनता को क़ानूनी तौर पर ऐसी कड़ी सजा क्यों?
इसका जवाब श्री नरेंद्र मोदी को जरूर देना होगा।
इसके आलावा देश की लगभग समस्त आर्थिक गतिविधि व करोड़ों व छोटे मध्यम व्यवसाय को ठग करके या भारत बन्द का जो आयोजन भाजपा सरकार द्वारा किया गया जैसे हालात अब पैदा हो गये ऐसा लग रहा है जैसे भारत बन्द हो गया हो, अर्थात यहाँ भारत बन्द का जो आयोजन भाजपा सरकार द्वारा किया गया है उससे अच्छे दिन की उम्मीद लगाये बैठे करोड़ों लोगों को अब यहाँ काफी ज्यादा बुरे दिनों का सामना करना पड़ रहा है और आगे सब इस स्थिति में यथाशीघ्र मुक्ति चाहते हैं।
इतना ही नही बल्कि केंद्र की सरकार द्वारा लोगों से एक महीने तक धैर्य रखने के लिये जो कहा जा रहा है वे सरकारी घोषणा वास्तव में लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा ही है ऐसा प्रतीत हो रहा है और अब यहाँ यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि केंद्र की भाजपा सरकार को इतने अपरिपक्व तरीके से व कच्चे तरीके से जनसाधारण को इतना अत्याधिक प्रभावित करने वाले फैसले लेने में इतनी जल्दबाजी व आपाधापी करने की इतनी जरूरत क्या थी।
जब हम जल्दबाजी बोलते हैं तो कल प्रधानमंत्री जी बोल रहे थे कि हमने ये फैसला कोई जल्दबाजी में नही लिया है, उनका यह कहना था कि हमने यह फैसला सीक्रेट रखा और 10 महीने से इसकी तैयारी चल रही थी।
मैं पूछना चाहती हूँ, (10 महीने का समय बहुत होता है) प्रधानमंत्री जी से कि 10 महीने में यदि इनकी सही मायनों में तैयारी होती तो आज जो बुरा हाल है पूरे देश के अंदर लोगों को एक-एक हजार के नोट भी नहीं मिल रहे, एटीएम मशीनें खराब पड़ी हुई हैं, बैंकों से पैसा नही मिल रहा है।
मैं इनसे पूछना चाहती हूँ की 10 महीनों में जो ये नये नोट ला रहे थे वह कहाँ हैं?
वो तो जनता के सामने आने चाहिये।
कभी ये छुट्टी का बहाना बनाते हैं, कभी बोलते हैं अभी पैसे आ रहे हैं थोडा इंतजार करो,
ऐसे ने जनता का बहुत बुरा हाल है।
पूरे देश के अंदर, तो ये आपाधापी जो मची हुई है, ये जो 10 महीनों की बात कर रहे हैं मैं समझती हूँ यह बिलकुल गलत है और 10 महीने का समय बहुत होता है, यदि 10 महीनों में इन्होंने पूरी तैयारी की होती तो ऐसी नोबत नहीं आती,
इन्होंने 500 और 1000 के नोटों पर जो पाबन्दी लगाई है हमारी पार्टी इसके खिलाफ नही है हम इसका वेलकम करते हैं लेकिन ये फैसला लेने से पहले इनको पूरी तैयारी करनी चाहिये थी।
यदि 10 महीनों की पूरी तैयारी होती तो 8 -9 तारिक से लेकर जो पूरे देश की जनता में जो हाहाकार मचा हुआ है, वे अपने कामकाज भूल गये, बुरा हाल है देश के अंदर, त्राहि-त्राहि मची है, अफरा-तफरी का माहौल पैदा है। ऐसा लग रहा है जैसे भारत बन्द हो गया हो हालात बड़े ख़राब हैं तो मैं समझती हूँ ऐसे हालत पैदा नही होते।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी प्रकार की जिद्दीभरी व अपरिपक्व पूर्ण किसान-विरोधी फैसला, नया भूमिअधिग्रहण कानून बनाने के सम्बंध में भी पहले लिया था जैसे अब ये कच्चा फैसला लिया है, अपरिपक्व फैसला लिया है तो ये भी आप लोगों को याद होगा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी प्रकार की जिद्दीभरी व अपरिपक्व पूर्ण किसान-विरोधी फैसला नया भूमिअधिग्रहण कानून बनाने के सम्बंध में भी पहले लिया था और उसके लिये एक ही अध्यादेश को अनेकों बार जारी करने जी जो हठधर्मी की थी, हालांकि बाद में भारी जनविरोध के मद्देनजर फिर इनको अपने उस फैसले को वापिस भी लेना पड़ा था, ये भी आप लोगों से छिपा नही है।
इसके साथ ही इन्होंने देश में 500 व 1000 रूपये के नोटों पर बोलते हुये यह भी कहा कि कि मेरे इस फैसले से देश में अमीर नींद की गोलिया खाकर और गरीब चैन की नींद सो रहा है।
इनका यह बयान पूर्णतया हवा-हवाई व खोखला है, इसके सिवाय कुछ नही है जबकि इस मामले में वास्तव में सच्चाई यह है कि इनके इस फैसले से देश में गरीब नींद की गोलिया खाकर और आमिर चैन की नींद सो रहे हैं, गरीब लोग या तो मारे-मारे घूम रहे हैं या लाइन लगाकर घूम रहे हैं।
सही मायने में गरीब नींद की गोली खाकर अपने घर में भूखे-प्यासे हैं तथा आमिर लोग चैन से सो रहे हैं यह उनको बोलना चाहिये था जो इस समय के वर्तमान हालात हैं जिनकी मदद के लिये यानि कि जिन अमीर लोगों की मदद के लिये जो चैन की नींद से सो रहे हैं जिनकी मदद के लिये इन्होंने 500 व 1000 के नोटों पर प्रतिबन्ध लगाने से पहले अंदर-अंदर व्यवस्था भी कर दी थी ऐसी आम चर्चा ये लोगों में है।