Thursday, January 7, 2016

बसपा और ब्राह्मण..

बसपा और ब्राह्मण..
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कुछ लोग कहते है कि मान्यवर कांशी राम जी की मृत्यु के बाद बसपा ब्राह्मण पार्टी बन गयी। और बहन जी को दोषी बताते हुए उनका विरोध करते हैं. मैं उनको बताना चाहता हूँ की श्री सतीशचंद्र मिश्रा जी को मान्वयर कांशीरामजी के उपस्थिती में ही सन 2002 को पार्टी में शामिल कर लिया था.. उससे पहले सन 1986 में ही टोपैझ कंपनी के मालिक जयंत मल्होत्रा नामक इस सवर्ण हिंदू को मान्यवर कांशीरामजी ने बसपा में शामिल कर लिया था और उसके बाद उन्हें राज्यसभा में एम.पी. बनाकर भेज दिया था.. जो आज भी राज्यसभा के रिकार्ड में दर्ज है.
फिर उसके बाद ब्राम्हणों की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के साथ समझौता करके उ.प्र. में बसपा की सरकार बनायी.. 4 महिने के बाद बसपा की सरकार गिर जाने के बाद मान्यवर कांशीरामजी ने सन 1995 में श्री रामविवर उपाध्याय और सीमा उपाध्याय जी इन दो ब्राम्हणों को पार्टी में शामिल कर लिया था.. और हाथरस इस लोकसभा से उन्हें उम्मीदवार भी बनाया था. और लोकसभा में भी चुनाव जीतकर पहुंचाया था.. इसके तुरंत बाद श्री ब्रजेश पाठक भी पार्टी में मान्वयर कांशीरामजी के उपस्थिती में शामिल हुए थे.. बाद में 2002 में मान्वयर कांशीरामजीने उ.प्र. के विधानसभा चुनाव में 37 टिकिटे ब्राम्हणों को दी.. 10 सीटे वैश्य को दी.. और 15 सीटे क्षत्रियों को देकर सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय का नारा उसी वक्त बुलंद किया था.. मान्वयर कांशीराम जी के ही सिद्धांतो पर बहन मायावतीजी चल रही हैं..
बाबासाहब ने ब्राम्हण श्री राजेंद्र प्रसाद के हाथों 1951 में मिलिंद कॉलेज का उद्घाटन किया था.. उससे पहले बाबासाहब ने 1925 में समता समाज संघ इस संगठन की स्थापना की थी.. जिसमें उन्होंने ब्राम्हणों को भी शामिल करने की बात की थी.. इसी साल बाबासाहब ने लोकमान्य तिलक के बड़े लड़के श्रीधर पंत तिलक को पुना जिले का समता समाज संघ का अध्यक्ष भी बनाया था.. ऐसा करके सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय का नारा इस देश में पहली बार बाबासाहब ने बुलंद किया था..
बाबासाहब से लेकर बहन मायावतीजी का एक ही उद्देश रहा है की.. इस देश के शोषित वंचित दमित पिडित दुःखी गरीब लोगों को इस देश का हुक्मरान समाज बनाया जाए और इस देश में समतामूलक समाज की स्थापना कि जाए.. जिनकी संख्या इस देश की लोकसंख्या के अनुपात में 85 प्रतिशत है, चाहे वो कोई भी समाज से हो.. या कोई भी धर्म से हो.. या कोई भी पंथ से हो. क्योंकी तथागत बुद्ध, सम्राट अशोक, संत कबीर, संत रविदास, गुरुनानक, महात्मा फुले, शाहू महाराज,, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, मान्यवर कांशीरामजी और ये सब महापुरुष इस देश में जातिविहिन समाज की रचना चाहते थे..
इसलिए बहन मायावतीजी ने समय के अनुसार प्रचार में परिवर्तन करके "सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय" का नारा इस देश में फिरसे बुलंद किया है. क्योंकी बाबासाहब ने सन 15 अक्तूबर 1956 को नागपूर के दीक्षाभूमी में कहा था की.. "हमें समय के बदलती परिस्थिती के अनुसार प्रचार में परिवर्तन करना चाहिए...
तो साथियों बहन जी उसी राह पर चल रही हैं जो उन्हें बाबा साहब एवं मान्यवर कांशीराम जी ने दिखाई थी. बहन जी पर आरोप लगाने वाले लोग राजनीति से प्रेरित हैं. उन की बातों में बिल्कुल भी मत आएँ. बसपा को चुनें और हाथी पर ही बटन दबाएँ.
जय भीम 
जय कांशीराम

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