मायावती बोलीं, मनुवादी सोच की महिला हैं लोकसभा अध्यक्ष
January 25,
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के जाति आधारित आरक्षण वाले बयान की निंदा की है.
उन्होंने कहा कि जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था संवैधानिक अधिकार है. कुछ लोग जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा के बहाने इसे खत्म करने की मंशा रखते हैं. इससे साबित उनकी दलित विरोधी सोच साबित होती है.
उन्होंने कहा कि जिस देश व समाज में हर क्षेत्र में और हर स्तर पर जन्म के आधार पर जातिवादी व्यवहार का प्रचलन आम बात हो, वहां उस जात-पात के अभिशाप के संवैधानिक निदान को समाप्त करने की बात करना अन्याय, शोषण व उत्पीड़न एवं अमानीयवता को और ज्यादा बढ़ावा देना होगा.
मायावती ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अहमदाबाद में जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा करने की बात कही थी. सुमित्रा महाजन का यह बयान उनकी मनुवादी सोच को जाहिर करता है.
उन्होंने कहा कि वैसे भी यह सर्वविदित है कि आरएसएस की संकीर्ण व घातक मानसिकता रखने वालों द्वारा समीक्षा की बात करने का अर्थ उस व्यवस्था को समाप्त ही करना होता है.
एक तरफ तो हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की जातिवादी उत्पीड़न के कारण आत्महत्या करने को मजबूर होने का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया है कि एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठी महिला ने अपने बयान से आग में घी डालने का काम किया है.
इतना ही नहीं बल्कि रोहित वेमुला को अगर मरने के बाद भी न्याय नहीं मिला तो यही माना जायेगा कि प्रधानमंत्री का इस मामले में भावुक हो जाना एक नाटकबाजी थी. उनके आंसू वास्तव में घड़ियाली आंसू थे.
मायावती ने कहा कि भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर कहा करते थे कि अंतरजातीय खानपान और अंतर जातीय विवाह आदि की इक्का-दुक्का घटनाओं से जाति व्यवस्था समाप्त होने वाली नहीं है.
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